← PrevNext →
Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
27 Dec 2021·1 min read·

वर्ष बाईस

मौत और मातम में गुजरा वर्ष इक्कीस ? नहीं चाहिए तनिक भी हमें आगे इनकी टीस !

कुछ अपनों को खोया कुछ सपनों को बोया , आरब्ध से अवसान तक हम सबने मिलकर ढोया !

ओमिक्रोन समझ न आया डेल्मिक्रोन भी संग में लाया? प्रकृति तेरी रीति-नीति ने खूब हमें हैं भरमाया !

नया साल हैं नई पहल पीना हैं अब नया गरल ? अब शायद उनका भी हल कठिन को करना सरल !

अनसुलझे को सुलझाने की जोर पर हैं आज़माइश ? झंझावातों से क्षत-विक्षत संभालेंगे तुझे भी बाईस !

©कुमार