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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

अभिमान हो तुम

मैं प्यार का प्रमाण और मेरा मान सम्मान हो तुम।

मैं माँ भारती की आरती और पूरा हिंदुस्तान हो तुम।

मैं घर की रौशनदान प्रिये सीमा की चौकस शान हो तुम।

मैं हूँ तेरा सांझ - सवेरा सूरज सा अभिमान हो तुम।

मैं सावन की गीली मेहंदी मेरे पायल की झंकार हो तुम।

चुड़ी महावर गजरा मेहंदी मेरे सोलह शृंगार हो तुम।

©#कुमार