एक शाम की चाय
ऊंगलियां बार-बार मोबाइल स्क्रिन पर जा रही थी मन कर रहा था मैसेज करुं या न करुं। उसने कल सोते समय प्यार का वास्ता दिया था कि देखते है हम दोनों का दिल कितना मजबुत है और प्यार कितना सच्चा हैं कि बिना मैसेज और फ़ोन किये हम दोनों कैसे रह पाते है? ....पर मैं आज मैसेज क्यों न करुं रोज तो उसे मैसेज करती हूं.... क्या प्यार-प्यार को ही रोक सकता है.....इसी उधेड़बुन में थी कि तभी भाभी आवाज लगाती है श्री उठ जाओ अब धुप निकल गया है अभी आई … भाभी...।
श्री, शुभम के वाट्सअप स्टेटश को चेक करती है देखती है वह ऑनलाईन है चेहरे पर खुशी की मुस्कान आती है अब तो मैसेज आएगा ही तभी एक क्षण के लिए उदास हो जाती है....वो मैसेज नहीं करेगा.....मां की आवाज आती है श्री क्या हुआ बाहर आ जाओ....नाश्ते का समय हो गया है....जी मां आती हूं......
रात में कुछ ज्यादा समय तक पढ़ाई हो गई थी क्या तुम्हारी... नहीं भाभी आज शुभम हम से बात नहीं करने के लिए कहा है तो हम लोग रात में लंबे समय तक बात करते रह गए वो कह रहा था कि हम देखते है हम दोनों का प्यार कितना मजबुत और सच्चा है तो आज हमदोनों नें अपने ऊपर एक परीक्षण किया है.....श्री घर के कामों में भाभी के साथ व्यस्त हो गई...पर बार बार मन मोबाइल पर ही होता था मैसेज आया होगा उसका.... शाम तक कोई मैसेज नहीं आता है.... आज छुट्टी का भी दिन है घर के सभी सदस्य घऱ में है.... सुबह चाय के समय यह तय हुआ था कि हम शाम की चाय पूरे घर वाले साथ में पियेगे और पड़ोसियों को न्योता दिया जाएगा.....
शाम होते ही श्री सोच रही थी काश मैं भी आज शुभम को बुला पाती और वह भी घऱ के सदस्य के रूप में हमलोगो के साथ चाय पी रहा होता....अब धीरे धीरे मेहमान भी चाय पर आने लगे थे....तभी श्री की नजर शुभम पर पड़ती है तो वह देख कर चकित रह जाती है....शुभम कुर्सी पर बैठता है उसी समय उसकी नजर श्री पर पड़ती है।
वह श्री को देखता है तो देखता ही रह जाता है दोनो की मूंह खुली की खुली रह जाती है तभी श्री का छोटा भाई घर वालों से उसका परिचय कराता है यह मेरा दोस्त है शुभम और मेरे साथ क्रिकेट खेलता है.....अब शुभम और श्री दोनों चाय की चुस्की के साथ एक दूसरे को देख रहे थे पर कुछ बोल नहीं रहे थे। मन ही मन दोनों अपने सच्चे प्यार पर गर्व कर रहे रहे थे और दोनों मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।
©#रत्नसेन
