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अनजान रास्ते
अनजान रास्ते कुछ कहती है। गोधोली की अंधेरी बेला, कुछ कहती है।
संभल, ना डगमगा, उठ रास्ते कितनी भी कठिन हो। चौधियाती चलती-रुकी प्रकाश पुंज, लगती रोक दें सफर।
ठहरती दूरियां, चाल है धीमी। रुक मत तू , चाहे कितनी हो चमचमाता व अंधेरा।
एक छोटी सी आशा भी, हाथ पकड़ती। वैसे ही, जैसे मद्धिम अंत:प्रकाश, रास्ते दिखाने को आतुर।
दीप खुद बनो, अपने अंदर के प्रकाश पहचनो। अनजान रास्ते बताती है, खुद ढूंढ़ो।
अपनी मंजिल खुद मिले, जीवन के रास्ते में। जीवन चुनती है, हम तो बस चलते है।
अनजान, अंधेरी राहें भी कुछ सिखाती है।
#लाइफ #रास्ते #प्रकृति
©#मिथिलेश कुमार
