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Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

अपनायें उन्हें

हुंकार भरें हम, प्रण करें हम। प्रशस्त करें मार्ग उनका, जो भटक गए अपने पथ से। जोड़े उनको भी, विकास की मुख्य धारा में। अपनायें उन्हें, समाहित कर, मार्ग प्रशस्त करें।

कोई छूट ना जाए, हर पथिक की अपनी महत्ता है। उनका भी करें राष्ट्र निर्माण में भागीदारी। उनकी भी एक संहिता है, उनके भी एक है वसूल। समझें, झांककर उनके अंदर भी मानवता है।

नक्सलवाद भी एक विचारधारा, समझे उनकी मजबूरी। अपनायें उन्हें, समाहित कर, मार्ग प्रशस्त करें। मानवता सबमें जिंदा है, समझे उनकी जरूरतों को भी। जोड़े उनको भी, विकास की मुख्य धारा में।

जूझ रहा ग्रामीण परिवेश, नक्सलवाद गंभीर समस्या है। लेकिन उनकी रोजी-रोटी, करते जैसे अफ़सर कमिशन खोरी। उनमें इनमें क्या अंतर है, बस इतना ही। वो जाने जाए लाल सलाम, ये तो खाकी वर्दी है।

वे है समरसता के प्रतीक, लालफ़ीताशाही एक गाली है। जो भ्रष्ट्राचार व नक्सलवाद के वाहक है। करें प्रतिकार इन सभी का, करें समुल अंत।

हुंकार भरे हम, प्रण करें हम। प्रशस्त करें मार्ग उनका, जो भटक गए अपने पथ से। मुड़ जाए नक्सलवाद, समाज सुधार की धारा में। अपनायें उन्हें, समाहित कर, मार्ग प्रशस्त करें।

उनकी संस्कृति का भी, करें मान हम। वो भी जी सके, एक सम्मान से। जोड़े उनको भी, विकास की मुख्य धारा में।

तब होगा, हमसब का भारत महान। लोकतन्त्र होगी, मजबूत। नक्सलवाद का करें अंत हम, मजबूत भारत की नींव रखें। हुंकार भरे हम, प्रण करें हम। प्रशस्त करें मार्ग उनका, जो भटक गए अपने पथ से।

#नक्सलवाद #समाजसुधार #लोकतंत्र

©#मिथिलेश कुमार