अपनी सुधार
खुद का परिचय खुद से कराओ तो अच्छा है। चहुंओर बाँटने से पहले प्रकाश खुद के अन्दर लाओ तो अच्छा है॥
जब-जब आगे बढ़ोगे तब-तब दुनियाँ गिरायेगी तुम्हें। बिना किसी के सहारे खुद ही खुद को संभालो तो अच्छा है॥
खादान से निकला सोना तपने पर आभूषण बनता है। सफलता प्राप्ति तक खुद को सहर्ष तपाओ तो अच्छा है॥
बदन को महकाने में सारी उम्र काट ली तुमने। साधना कर अपनी आत्मा को महकाओ तो अच्छा है॥
और कबतक मात-पिता के सहारे जिओगे तुम ? खुद को उनका एकमात्र सहारा बनाओ तो अच्छा है॥
प्रतिस्पर्धा के इस दौर में एक-दूसरे से ईर्ष्या न करो। खुद से श्रेष्ठ सहपाठियों से प्रेरणा पाओ तो अच्छा है॥
दुनियाँ की अन्धी दौड़ में चल लिये हो बहुत, अब खुद की अपनी अलग पहचान बनाओ तो अच्छा है॥ Alive words of Akarshit.
©#आकर्षित मौर्य
