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आत्मनिर्भरता
कैसी आत्मनिर्भरता के फार्मूले हम नए गढ़ रहे हैं ! प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हैं तो भला हम कैसे आगे बढ़ रहे हैं ?
नदी किनारे उछल उछलकर दलदल में हम और धंस रहे हैं ! विदेशों से पैसा लेकर हम क्या नए जाल में नहीं फंस रहे हैं ? <!--more-- देखो कैसे तत्सम से तद्भव तक विकास आपस में ही लड़ रहे हैं ! हम निजीकरण के पेंच में जड़कर राष्ट्रवाद के नाम पर बेबजह अड़ रहे हैं ?
©#कुमार
