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Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·2 min read·

अयोध्या नगरी -लोकेशन,फाउंडर एंड फीचर्स-बालकांड लेख-1

रामायण का मुख्य पात्र श्रीराम जी का जन्म अयोध्या में हुआ इसलिये आइये रामायण कालीन अयोध्या नगरी के बारे में जान लेते है।उस समय की अयोध्या नगरी आज का अयोध्या शहर है जो राम मंदिर एवं बाबरी मस्जिद के केस को लेकर अक्सर समाचार में बना रहता है। अयोध्या नगरी तत्कालीन कोसल जनपद का भाग था।कोसल प्राचीन भारत के सोलह महाजनपदों में से एक था। इसका क्षेत्र आधुनिक गोरखपुर के पास था। इसकी राजधानी श्रावस्ती थी।

अयोध्या सरयू नदी के किनारे पर बसा हुआ है।सरयू नदी गंगा की एक सहायक नदी है जो हिमालय से निकलकर उत्तरी भारत के गंगा के मैदान में बहते हुए गंगा में मिल जाती है और इसका जल बंगाल की खड़ी में समा जाता है।

अयोध्या नगरी को महाराजा मनु ने बसाया था। रामायण में अयोध्या को संतुष्ट लोगों वाला नगर बताया गया है।यहाँ लंबी,चौड़ी एवं सुंदर सड़कें थी।सड़कों पर जल छिड़का जाता था,फूल बिछाये जाते थे।शहर में शॉपिंग मॉल थे ।सेक्यूरिटी का अच्छा अरेंजमेंट था-सुरक्षा उपकरण और आधुनिक हथियार मौजूद थे। शहर में पार्क ,स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स,स्विमिंग पुल ,जिमख़ाना,इत्यादि भी थे।

सामाजिक व्यवस्था की बात करें तो ऊंची-नीची वर्ण एवं जाति व्यवस्था उस समय भी मौजूद था।समाज में महिलाओं की स्थिति ठीक थी।राजा और रानी मिलकर राज दरबार में बैठते थे।कला की कद्र तब भी होती थी।नृत्य,गायन,पेंटिंग(रंगोली) इत्यादि को सराहा जाता था।आभूषण का प्रचलन बहुत ज्यादा था।

वास्तुकला अपने उन्नत स्तर की थी।नगर के मकान आकर्षक थे।अवसंरचना विकास के लिये एक्सपेर्ट इंजीनियरिंग की पढ़ाई होती थी।नल और नील ने समुद्र में पुल बनाया था जिसके साक्ष्य आज भी भारत और श्रीलंका के बीच राम सेतु के रूप में मौजूद है।

यातायात में जानवरों यथा-हाथी,घोड़े,खच्चर,आदि द्वारा चालित वहाँ प्रमुख थे।उस समय मोटर इंजिन का आविष्कार नहीं हुआ था।अनाज के गोदाम थे।आपातकाल में फूड सेक्यूरिटी के लिये इन्हे उपयोग किया जाता था।कानून का शासन था।लोगों का राज्य और राजा पर पूर्ण विश्वास था।युद्ध छोड़कर भागने वाले को जान से नहीं मारा जाता था।

वन्यप्राणियों का शिकार किया जाता था।लोग आस्तिक विचारधारा के होते थे।कान में कुंडल,सिर पर मुकुट,गले में फूलों की माला,गहने मुख्य ड्रेस हुआ करता थे।भिखारियों को भीख देने की प्रथा थी।भोजन में मिलावट नहीं किया जाता था।