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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

आयुर्वेद की ओखली

आयुर्वेद की ओखली में बाबा जी ने मिलाई भांग। अनुलोम विलोम करने लगे कोरोनिल में फंसा कर टांग।

प्राणायाम से आगे बढ़े भ्रामरी तक ठीक ठाक । बात बिगड़ी तब जाकर जब शीर्षासन पर आई सरकार।

योगी से हठयोगी हुए फिर, व्यपारिक विस्तार। आँख तरेरी जब शासन से मंत्रालय ने किया सब तार।

स्वघोषित ध्वजवाहक बने आयुर्वेद को किया विषण्ण। विश्वासों की बलि चढ़ाकर आखिर, कैसे हो आयुष प्रसन्न।

©#कुमार