बलात्कार
मन आंदोलित हो उठता है, देखकर हतरस की घटना। यह बलात्कार ही नहीं, समान्य लोगो के साथ पक्षपात है। रसूखदारों ने लूटी एक, बच्ची की इज्जत मार डाला, गर्दन, कमर तोड़ डाली, गुनहगारों ने। केवल एक दलित की बात नहीं है, सबकी की बच्चियां खतरे में।
धज्जियां उड़ा दी, नौकरशाहों एवम् सरकार की तिकड़मबाजी ने। जो धनबल को मजबूत, इसका मतलब अन्याय करे। शरेआम लूट लिए जाते इज्जत, कानून का कोई कौफ नहीं। लीपापोती कर दी, कानून के रखवाले ने।
मुआवजा का प्रलोभन देकर, चुप कराया परिवारवालों को। एक मौत होती जब, जब हुआ उसका सामूहिक बलात्कार। दूसरा जब 14 दिन तक अधमरी, छटपटाती, दौड़ लगाती अस्पतालों की। झटपट दाह संस्कार किया पेट्रोल के आग से, कौन सा सनातनी सरकार।
मीडिया लग गए, बात का बतंगड़ बनाने। कहते उच्च नीच जात का मामला जैसे। लगता जरूर है, पर बात हट के है। यह दबंगई की बात है, कानून की असफलता है।
इज्जत लूटने की बात, मानवता के लिए शर्मनाक है। हर साधारण वर्ग की बात है, सबकी बहू बेटियां खतरे में है। दलित या उच्च की नहीं, यह बुराई एवम् अच्छाई की बात है। इज्जत लूट ली, मार डाला, केवल यह दलित - उच्च वर्ग तक की बात नहीं।
हम करते विरोध, गैरजिम्मेदाराना पत्रकारिता, सरकार की नाकामी का। हमे चाहिए बच्चियां की सुरक्षा, महिलाओ की स्वतंत्रता। चले सही गलत का फर्क समझे, गलत करने वालो की कोई जात या धर्म नहीं। करें विरोध सभी गलत का, असमर्थन इन बलात्कारियों का। कभी जात, धर्म, क्षेत्र के आधार पर, कोई भी रशुकदार बच ना निकले।
कानून का खौफ नहीं जैसे, सरकार उनकी कठपुतली है। जागे सरकार, दो न्याय, सुरक्षा हर महिला को, दो स्वतंत्रता। मन आंदोलित हो उठता है, देखकर हतरस की घटना। यह बलात्कार ही नहीं, समान्य लोगो के साथ पक्षपात है।
गलत तो गलत है, चाहे संभ्रांत लोग ने की या एक बेचारे ने। कोई भी गलत ना रहने देंगे, करे असहयोग, विरोध कोई सभी गलत का। तभी नया सुबह आएगी, सूरज का प्रकाश फैलेगा। रणनीति बनाए, राजनीति ना करें। पत्रकारिता संयमित एवम् जिम्मेदारीपूर्वक करें, तभी देश बच पाएगा। #HathrasGangRape ©#मिथिलेश कुमार
