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Akarshit Maurya
Akarshit MauryaCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

बता दो मुझे!

बता ही दो मुझे और कितने पेड़ कटवाना है। कुल्हाड़ी के प्रहारों को सह और कितना खून बहाना है॥

पूँछो उन अबुजलों से जिन्हें मुझे अहोरात्र अपनाना है। अब तुम ही बता दो मुझे और कितने दृगंबु बहाना है॥

पूँछो उन हवाओ से जिनमे मुझे आक्सीजन फैलाना है। तेरी निष्कासित हवा को मुझे ही तो अपनाना है ॥

तीक्ष्ण रश्मियों को अवशोषित कर तुझे अवलम्ब दे जाना है। ऐ स्वार्थी मानव फिर भी तुझे मेरे ही दृगजलों को बहाना है॥

संकल्प करो इस पर्यावरण दिवस पर एक-एक वृक्ष लगाना है। प्रकृति को माँ मान सेवा मे उसकी पूरे कल्ब से जुट जाना है॥ Alive words of Akarshit.

©#आकर्षित मौर्य