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वंदनीय भगवती देवी शर्मा
सच्ची श्रद्धांजलि चढ़ाऊँ मैं।
माता जी की श्रद्धाजंलि में, अर्पित सब कर जाऊँ मैं। माँ की ममता के आगे , नतमस्तक हो जाऊँ मैं ॥
माँ का प्यार और पिता का दुलार पाया है जिनसे। ऐसी स्नेहसलिला के प्रति, शत्-शत् शीश झुकाऊँ मैं॥
विचार क्रान्ति के धागे में, मोती भाँति पिरोया है जिननेI साहस देना ऐसा माँ कि विचारों को आपके जन-जन तक फैलाऊँ मैं॥
गायत्री परिवार के प्रत्येक सदस्यों को अपना बनाया है जिनने। आशीष दो ऐसा माँ परिवार का नैष्ठिक कहलाऊँ मैं॥
आत्मा को शुद्ध करने वाले विशुद्ध सूत्रों को दिया है जिनने। उन्हीं सूत्रों को चरितार्थ कर आपको सच्ची श्रद्धाजंलि चढाऊँ मैं॥ Alive words of Akarshit.
©#आकर्षित मौर्य
