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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·2 min read·

भारत-चीन के दरकते रिश्ते

एक पुरानी कहावत हैं कि जब रोम में आग लगी हुई थी तो नीरो बांसुरी बजा रहा था ! ठीक वही बात आज चीन पर लागू हो रहा हैं ? जिसकी वजह से हम तकरीबन चार माह से दोनों आमने-सामने अपनी प्रभुता को लेकर खड़े हैं। भारत चीन विवाद ये कोई आज की नई समस्या नहीं हैं यह तो हमारी आज़ादी से भी पहले बोये गये विषक्त बीज का वह पेड़ हैं, जिसकी छाया हमें आज तक झुलसा रही हैं !

मूल कारणों से अवगत हेतु हमें अतीत का दृश्यांकन करना होगा और इतिहास के पन्नों पर दृष्टिपात से पता चलता हैं कि हमारी हड़प्पा सभ्यता को दुनियां की सबसे पुरानी सभ्यता होने का गौरव प्राप्त हैं। पर, चीन खुद को दुनियां की सबसे पुरानी सभ्यता का वारिस कहलाने का दंभ भरता हैं ?

दूसरा, एशिया में ख़ुद को सबसे ताकतवर दिखा कर दुनियां में नंबर एक होने सपना भी पलता है ! साथ ही, उसके इतिहास पर प्रकाश डाले तो हम पाते हैं कि अपनी आंतरिक विफलता को छिपाने के लिए भी अपने किसी पड़ोसी पर युद्ध थोपता हैं या किसी विवादित सीमा रेखा की नई परिभाषा गढ़ अपने अवाम को ये दिलासा दिलाता हैं कि देखो हम पड़ोसी से दो-दो हाथ करने में सर्वथा सक्षम हैं !

भारत हमेशा ही चीन के प्रति नरम रहा...पर, इसके उलट चीन ने हमारा इस्तेमाल किया और वक़्त बेवक़्त आँखें भी तरेरी ! और, ये सिलसिला माओत्से तुंग काल से अनवरत जारी हैं, जिन्होंने नेहरू जी, जिन्हें भारत का कर्जन कहा जाता हैं, के बुने सपने को छिन्न-भिन्न कर नेहरू काल को जल्द समापन में अपनी अहम भूमिका निभाई ।

आज जो जिंग पिंग अपनी करतूतें बो रहा है वो अपने पूर्वजों से पूछे कि उसे सबसे पहले अलग राष्ट्र की मान्यता भारत ने ही दी थी और संयुक्त राष्ट्र में स्थाई सदस्यता के लिए तीसरी दुनियां के देशों को एकीकृत किया और तो और बांडुंग सम्मेलन (१९५५) में नेहरू ने ही चीन को बांकी दुनियां के करीब लाया । पर, ऐसे अनेकों अहसानों को अतीत से वर्तमान तक ड्रैगन ने अपनी परिपाटी के अनुरुप बिसराया ?

डोकलाम तो बहाना हैं रेशम मार्ग व ग्वादर पत्तन निशाना हैं! चूंकि, चीन को पश्चिमी देशों से व्यापार के लिए सबसे सस्ते और भरोसेमंद रास्ते के लिए उसे ग्वादर पत्तन और पीआरआई प्रोग्राम के तहत पुराना सिल्क मार्ग चाहिए जो कल भी भारत के बिना सहयोग मुश्किल थी और आज भी मुश्किल हैं ! बस इसी वजह से ड्रैगन अक्सर हमपर फुंफकार भरता रहता हैं ?

चीन अपनी विस्तारवादी नीति और हालिया कोरोना (कोविड-१९) जैसी महामारी को लेकर यूँ तो दुनियांभर में अपनी फज़ीहत करा ही रखी हैं, साथ ही, भारत से उलझ कर उसने और भी बड़ी गलती कर दी हैं ! क्यूंकि, चीन ये भूल रहा हैं कि भारत ने बीते वर्षों में कूटनीतिक रूप से दुनियां में अपनी एक अलग छाप छोड़ने की अपनी विरासत में कुछ जरीब और जोड़ें हैं।

©#कुमार