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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

भूल आए हम वो गलियां...

फिर मिलो तो बात करें, यूं जाया ना जज़्बात करें ! कहने को तो हैं बातें बहुत सी, पर कहाँ से शुरुआत करें ?

अलहदा सा वो अल्हड़पन, वो सोखी सी चंचलता जो, मिलने की खुशीयों से ज्यादा, बिछुड़न की आकुलता वो ?

दर्दों में हम खो भी लेते, खुशियों में हम रो भी लेते, होश न खोते जोश न बोते, काश ! कि हम बड़े न होते ?

©#कुमार