← PrevNext →
चुनावी राग
अंधों ने देखा विकास लंगड़े भी दौड़ पड़े ! गूंगो के भी मुख आज मोतियों से शब्द झड़े ?
बहरे करे वाह वाह रो रहा ठगा विकास ! मानवता की पड़ी लाश कल का कोई दे तो आस ? <!--more-- कल की दुश्मनी भूला आज बन रहे नये यार ! एक ही घाट देखो आज पानी पी रहे गीदड़-सियार ?
दल-बदल चाटुकार अंधभक्ति वाला बेसुरा राग ! अवाम हैं देखो कैसे लाचार चमचे दशहरे में गा रहे फाग ?
©#कुमार
