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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

चुनावी राग

अंधों ने देखा विकास लंगड़े भी दौड़ पड़े ! गूंगो के भी मुख आज मोतियों से शब्द झड़े ?

बहरे करे वाह वाह रो रहा ठगा विकास ! मानवता की पड़ी लाश कल का कोई दे तो आस ? <!--more-- कल की दुश्मनी भूला आज बन रहे नये यार ! एक ही घाट देखो आज पानी पी रहे गीदड़-सियार ?

दल-बदल चाटुकार अंधभक्ति वाला बेसुरा राग ! अवाम हैं देखो कैसे लाचार चमचे दशहरे में गा रहे फाग ?

©#कुमार