कोरोना का दुःख
देखो सब अपना घर, कितना सुन्दर, कितना प्यारा। सूरज की किरणें आतीं साथ में नया सवेरा लाती, बड़ें प्यार से हमें जगातीं। साफ हवा हरदम है आती, इसमें रहते मम्मी-पापा, दादा-दादी। सुबह से होती है भागम-भाग, सब करते हैं अपना काम।
बस्ता टांग स्कूल हम जाते, पापा भी ऑफिस जाते, मम्मी भी करती भागम भाग।
शाम तक फिर सब वापस आते, अच्छा लगता है सबका आना, कई तरह की कहानी सुनाते।
नाना-नानी, मामा -मामी अक्सर आते, बुआ-फूफा,भाई-बहन भी रंग जमाते।
पर अब, सूरज सुबह तो आता है, नई रोशनी रोज लाता है। चिड़िया मीठे बोल सुना रही है, गाएँ भी रंभा रहीं हैं,,,,
पर, नहीं है वो भागम-भाग, शहरें पड़ी हैं सुनसान. हवा सुंदर बह रही है , पर बंद पड़े हैं सब घर-मकान.
पता नहीं कैसा साया है, जिसने सबको डराया है।
कोरोना ने सब नाम दिया हैं, जिसने सबका जान लिया है।
मुहल्ले पड़े है सुनसान, लगता है सब शहरों से भागे हैं।
कब खत्म होगी यह आफत, कोई न यह जाने है।
सब कहते घर में रहो, कोरोना को दूर भगाना है।
नहीं हैं जिनके घर उसको खूब सताएगा, मदद करो उनकी तुम, पुण्य तुम तक आएगा।
देखो सब अपना घर, कितना सुंदर, कितना प्यारा, कोरोना को दूर भगाता।
घर में रहना बाहर ना जाना, सब अपनी जान बचाना।
©#अमृता
