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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

दागदार दर्पण

बॉलीवुड में पूड़िया गैंग आम हो गया, एनसीबी को भी सुबह से शाम हो गया ! थाली में छेद गिनना भी एक काम हो गया, तब बिहारियों को खैनी पे गुमान हो गया !

रिया भी अब जातीय सामान हो गया , इक दूजे को बचाना भी सरेआम हो गया ? सुशांत को मिले न्याय बात शांत हो गया, बस ट्वीट करके जैसे उनका नाम हो गया ?

हमने तो था सुना कि आईना हैं समाज का, पर, दर्पण वही तो आज दागदार हो गया ? अनगिनत मिले हैं धब्बे आईने के अक्स पर, कितनों की मौत का वो राज़दार हो गया ?

©#कुमार