देश खतरे में है
देश खतरे में है, चीन देश का घेरा। चल रही गलवान की, खींच तान।
उतारू है, फैलाए कैसे उपनिवेश। मुंह की खानी होगी, जो हमसे टकराए।
दुश्मनों को नेस्तनाबूत करने की ठानी हमने। कूटनीति की तलवार, खींच पड़ी है मयान से।
अब चीन देश को मुंह की खानी होगी। देश की सीमा अक्षुण्ण रहे, जवानो का है तांता।
करे बहिष्कार उनके, सामानों का। जाग गए है, हर हिन्दुस्तानी।
होड़ है, देशी विनिर्माण की। सशक्त भारत की नींव , है पड़ चुकी।
भारत का बच्चा-बच्चा, चीख कर रही पुकार। चीन देश को ना टिकने देंगे, थाम देंगे उसकी रफ्तार।
जल, थल, आकाश से हम, कर देंगे उन्हे बर्बाद। हमने यह ठानी है, देश नहीं बिकने दूंगा।
यह देश नहीं मिटने दूंगा, आंच नहीं आने दूंगा। कर जंग अपने सम्मान की, राष्ट्र नहीं झुकने दूंगा।
ले कसम इस राष्ट्र की, तिरंगा ही चिता होगा। कर देंगे हम बर्बाद उन्हे, जो भारत से टकरायेगा।
देश खतरे में है, चीन देश का डेरा...
©#मिथिलेश कुमार
