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देव स्थापना
बेडौल पत्थर ने जब कर दिया समर्पित स्वयं को नदी की धारा में,
धारा के साथ तयकर सैकड़ों दूरियाँ आई उसमें चिकनाई।
वह बेडौल पत्थर बन गया एक वृत्ताकर पिण्ड,
मानो अब वह अर्थ हो-- सूर्य का चंद्र का पृथ्वी का ग्रहों का तारों का अखिल ब्रह्माण्ड का।
सभी की आस्थाओं का प्रतीक वह विश्व के कल्याण में निरत शिव वह उसकी स्थापना घरों में देव स्थापना है!
©#रंजीत
