एक सवाल ?
काँग्रेस के लिए :
बातें कर ली चार और फ़ोटो भी खिंचवाई ! हंसी ठिठोली वाली टोली कष्टकर हैं मस्ती से मातम की खाई ?
सपा के लिए :
दुःख की घड़ी में ये तेरी कैसी रुसवाई ! कल तक गलती हो जाती थी आज कहाँ से आई पुरवाई ?
भाजपा के लिए :
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ख़ूब नारा दिया ! फिर क्यूँ हर दिन मानवता को तार-तार हैं करवाई ?
सरकार के लिए :
बेटी बचाने वालों तेरी नियत में खोट आई ? बेटियों के स्वाभिमान पर ये जो नित नई चोट पहुंचाई !
मीडिया के लिए :
इस मामले में पत्रकारिता जरूर चौथे स्तम्भ में आई ! पर देश के सभी मुद्दों में ऐसी नहीं निष्पक्षता दिखाई ?
जाँच एजेंसियों के लिए :
नाकाम से जैसे हो गए हैं पुर्जे सरकार के ! तभी तो दरिंदे हमेशा ही बेखौफ़ व्यभिचार कर पाई ?
न्यायपालिका के लिए : न्याय में देरी से भी मिलता हैं बढ़ावा गुनाह को ! फिर दे कुछ मिसाल न्याय का क्यूँ नहीं गुनाहगारों में खौफ़ जगाई ?
©#कुमार
