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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

एक सवाल ?

काँग्रेस के लिए :

बातें कर ली चार और फ़ोटो भी खिंचवाई ! हंसी ठिठोली वाली टोली कष्टकर हैं मस्ती से मातम की खाई ?

सपा के लिए :

दुःख की घड़ी में ये तेरी कैसी रुसवाई ! कल तक गलती हो जाती थी आज कहाँ से आई पुरवाई ?

भाजपा के लिए :

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ख़ूब नारा दिया ! फिर क्यूँ हर दिन मानवता को तार-तार हैं करवाई ?

सरकार के लिए :

बेटी बचाने वालों तेरी नियत में खोट आई ? बेटियों के स्वाभिमान पर ये जो नित नई चोट पहुंचाई !

मीडिया के लिए :

इस मामले में पत्रकारिता जरूर चौथे स्तम्भ में आई ! पर देश के सभी मुद्दों में ऐसी नहीं निष्पक्षता दिखाई ?

जाँच एजेंसियों के लिए :

नाकाम से जैसे हो गए हैं पुर्जे सरकार के ! तभी तो दरिंदे हमेशा ही बेखौफ़ व्यभिचार कर पाई ?

न्यायपालिका के लिए : न्याय में देरी से भी मिलता हैं बढ़ावा गुनाह को ! फिर दे कुछ मिसाल न्याय का क्यूँ नहीं गुनाहगारों में खौफ़ जगाई ?

©#कुमार