Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

व्यायाम, योग और ध्यान

सबसे पहले आपसे क्षमा माँग लूं इस बात के लिये कि एक अल्पज्ञान वाले विषय पर लेख लिखकर आपका समय बर्बाद करने की जुर्रत कर रहा हूँ।लेकिन उन लोगों के लिये यह लेख फायदेमंद हो सकता है जिन्हें लगता है व्यायाम,योग और ध्यान मिलती-जुलती चीज है।

लोग समझ लेते है कि ये व्यायाम और योग तो लगभग एक ही चीज है,हाँ ध्यान थोड़ा अलग है।एक व्यक्ति से मैंने पूछा तो उसने एक ही सांस में  परिभाषा दिया कि -जल्दी-जल्दी में उठक-बैठक करना,दौड़ लगाना आदि व्यायाम है;चटाई पर खड़े होकर धीरे-धीरे टांग ऐंठना,नाक से फों-फों करना आदि योग है; तथा आँखें बंद करके होंठों को पटपटाना और झपकी आने पर घोलट जाना ध्यान है।

उपरोक्त महाशय के कथन अर्धसत्य है।आइये पूर्ण सत्य को जानने की हम कोशिश करते है।

व्यायाम करने के लिये हमें जिम या खुले मैदान आदि की जरूरत पड़ती है।शोर,अंग्रेजी बिट्स और थिपकी म्यूजिक में भी हम अच्छा व्यायाम कर सकते है।व्यायाम से हमारी मांसपेशियों मजबूत होती है,उसमें रक्त संचार बढ़ता है और हमारे में स्टैमिना विकसित होता है।व्यायाम जवान लोगों के लिये है।खिलाड़ियों, फौजियों ,पहलवानों,इत्यादि के लिये व्यायाम अनिवार्य होता है।

योग करने के लिए  हमें एक कुशल योग प्रशिक्षक की जरूरत पड़ती है।क्योंकि इसमें थोड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है।दो तरह के योग होते है-सूक्ष्म योग और स्थूल योग।एक कमरे में एक चादर बिछाकर भी योग किया जा सकता है।बच्चे,बूढ़े,जवान,गर्ववती, प्रसूति सभी लोग योग कर सकते है।संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किये जाने के बाद पूरे विश्व में योग करने का प्रचलन बढ़ा है।योग,रोग भगाने और स्वस्थ रहने की सर्वसुलभ और कम खर्चीला साधन है।

ध्यान,मन का व्यायाम और योग है।तकनीकी भाषा में तन को अगर हार्डवेयर माने तो मन उसके अंदर का सॉफ्टवेयर है।एक रोगी और अस्वस्थ व्यक्ति ध्यान नहीं कर सकता।ध्यान के लिये एक स्वस्थ और स्वच्छ शरीर चाहिये।

निरोग रहने के लिये व्यायाम और योग किया जाय और आत्मविश्वासी,लगनशील,कर्मठ, अडिग,इच्छाशक्ति सम्पन्न बनने के लिये ध्यान किया जाये तो हमारा जीवन सुखी और सफल दोनो हो सकता है।