जीवन नैया
अपनी अपनी नैया सबकी, बैठा मन का चोर। / मझधार में डोल रही है, ठहरा सा है क्यों। / सागर की लहरों पे भरोसा, ले जाती है साथ। / जीवन की धारा को बहने दो, पर दिशा हो ज्ञान कि।
छोर इसे ना लहरों की तरंगों पर, बहा ले मन चाहे। / सुरती लगा, रम जा अनुभव करने में तू, कहां जा रही। / जीवन की डोर छूट रही हो, पर रख नियंत्रण में। / बह तू खुद के नियंत्रण में, प्रकाशित हो सत्य की राहों पर।
रास्ते बहुत है, मंजिल जीवन की यहीं है। / संतुलन बना, लहरों एवम् अपने नियंत्रण के बीच। / सुरती लगा, रम जा करने में तू, कहां जा रही। / आगे बढ़, खे अपने नैया मन चाहे दिशा में।
डूबती नैया को संभाल इसे, जरा उबार इसे। / मझधार में क्यो, लगा इसे किनारा। / बहने दे, सागर की लहरों के साथ। / रख नियंत्रण, कर संतुलन लहरों के साथ बहने दे।
अपनी अपनी नैया सबकी, बैठा मन का चोर। / मझधार में डोल रही है, ठहरा सा है क्यों। / सागर की लहरों पे भरोसा, ले जाती है साथ। / जीवन की धारा को बहने दो, पर दिशा हो ज्ञान कि।
#flowoflife
