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Twinkle
TwinkleCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

गुलाबी शाम

गुलाबी रंग मेरे कपड़ों में देख उसने ये कदम उठाया था, कुछ बोलने में शर्माता था इसलिए गुलाबी ही कुर्ता पहन कर आया था।

तारीफ करने में थोड़ा हकलाता था, बिना बोले ही सबकुछ कह जाता था, आंखों से ही दिल का हाल सुनाया, आखिरी समय तक भी कुछ कह ना पाया।

जब वापस जाने का टाइम आया तो हिम्मत कर उसने आवाज़ लगाई, ओर बोला सुनो....... ...आज तुम अच्छी लग रही हो।

दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी क्या बताएं कितनी प्यारी वो शाम थी।