गुरुओं को नमन
उन्हें शत् शत् नमन, जो ज्ञानपुंज जलाते हैं । कोटि-कोटि जनों के प्रेरणा स्त्रोत बन जाते हैं।
जिन्दगी में हार न मानने का एहसास जगाते हैं । जो तिमिरांचल में डूब रहे, उनके अन्तर्मन में एक समा जलाते हैं ।
राष्ट्र के नव निर्माण में अपना सर्वस्व लुटाते है । सींच के अपने ज्ञान से, इस धरा के उत्थान में अडिग कदम बढ़ाते हैं ।
नर रत्नों के सृजन में, अपना सुख-चैन बलिदान कर जाते हैं । जिनके त्याग के बदौलत नरेन्द्र विवेकानंद बन जाते है।
दृढ़ संकल्प ऐसा, जो सम्राट चन्र्दगुप्त मौर्य बनाते हैं । कभी द्रोण,कभी भीष्म, कभी विश्वामित्र,कभी चाणक्य, कभी रामकृष्ण परमहंस, कभी श्रीराम शर्मा आचार्य, कभी राधाकृष्णन ,कभी कलाम बन अद्मय साहसी ,सैनिक खड़ा कर जाते हैं ।
उस परम शक्ति के वर्णन का सामर्थ्य कहाँ? मुझे, जहाँ स्वयं देवता शीश झुकाते हैं। है कोटि-कोटि वन्दन उन्हें जो गुरु का रूप धरे,इस धरा पर आते हैं । गुरु के शब्दों को हम गुरु के चरणों में चढाते हैं।
जीवन को दिशा प्रदान करने वाले सभी गुरुओं को अर्पण,जो हमारे जीवन में एक पल भी दिशाप्रदान किया हो, सबको वन्दन ।राष्ट्र के सभी शिक्षक समुदाय को, शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई ।
©#सतीश
