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Akarshit Maurya
Akarshit MauryaCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

हिन्दी हमारी पहचान

जिससे भविष्य ही न सँवरे, वो आशा किस काम की। जिससे स्वदेश ही न उभरे, ऐसी भाषा किस काम की॥

जोश जगाती रणवीरो में, तिरंगें का मान है हिन्दी। जिसे परदेश की इच्छा हो, उसकी अभिलाषा किस काम की॥

हिन्दू हैं हम,हम सभी की निरूपम पहचान है हिन्दी। जहाँ हिन्दी का सम्मान नहीं, वहाँ निराशा किस काम की॥

वीरों की गाथा गाती, इस मिट्टी की जान है हिन्दी मातृभाषा को वंचित करे, ऐसी दिलाशा किस काम की॥

अपनेपन की शीतल सरिता, प्यारी जुबान है हिन्दी। हतप्रभ हैं जो अंग्रेजी बोलकर, ऐसी हताशा किस काम की॥

दुनियाँ मे लहराती परचम, भाषाओं में महान है हिन्दी। जो हिन्दी न बोल पाये, उसकी भाषा किस काम की॥ Alive words of Akarshit.

©#आकर्षित मौर्य