हम बिहार हिला
हम बिहार हिला। मगध की धरती, रखले एक इतिहास। मगधी भाषा काफी हेवे, हमर पहचान खातिर। जेकर सीमा फैलल, अफ़गानिस्तान तकले। मगध सम्राज्य के वैभव, कौन ना जानल।
कब तक हमलोगन के छोरले रहबे, हमनी थोरिके छोरब। हमरो चाही, इक अलगे पहिचान। हमरो भषइया तो शामिल, होवे के चाही आठवीं अनुसूची में। अखनी तखनी ना चाहे, हमरो लिपि हेबे। जेकरा कहल जाए, कैठी हैबे।
चन्द्रगुप्त के कौनी ना जनाल, उनकर बेतवा हलन अजातशत्रु। सब ओरन फैलन इनकर साम्राज्य, फिर काहेल ऐसन बेखुदी। काहे के अनजान बनेला, हमरो चाही जगहवा संविधान में। संरक्षित करी ई धरोहर के, मगही हमार पहचान हिला।
हम बिहार हिला। मगध की धरती, रखले एक इतिहास। हमही तो इतिहास हिला, मगही बोल हिला। मस्तिया मार मार के, खूब खुश हिला। हमरो जगहा चाही, ई संविधान में। मगधी लोगन के सम्मान चाही, मगही हमरा पहचान हाबे।
हम मगधी हिला, हम बिहार हिला। हमरो के स्थान चाही, हमरो के पहचान चाही। कर ला शामिल अपन लोगो के भाषा, ई आठवीं अनुसूची में। अपन लोगन के मान रखा, हमलोगन के सम्मान दे द।
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©#मिथिलेश कुमार
