IAS साहब का गंगनम स्टाइल !!
मैं बात कर रहा हूँ छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के प्रशिक्षु IAS जगदीश सोनकर की जिसने अपने कॅरियर के शुरुआत में ही नैतिकता के नए मानक स्थापित कर मिडिया में छाये हुए हैं !
वैसे ये साहब पहले साहब नहीं हैं जो नैतिकता का नवाचार करते देखे गए हैं!इससे पहले भी कई IAS साहब नैतिकता का जमकर नवाचार किये और मिडिया की चमक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए नए नैतिक नियमों से समाज को रूबरू करवाए !
मैं यहाँ उस IAS साहब की गंगनम स्टाइल की चर्चा नहीं करूँगा क्योंकि इस विषय पर मिडिया वाले तथा कुछ डिजिटल बुद्धिजीवी ने जीतोर मेहनत की हैं !
सबसे अनोखी बात इस मामले में जो देखने को मिली सुचना क्रांति के क्रांतकारीयो की प्रतिक्रिया!
- कुछ लोग UPSC को गाली दे कर अपनी मानसिक कुंठा को शांत कर रहे हैं ! कुछ तो यहाँ तक अपनी वैचारिक सिमा का विस्तार करते हुए कहा कि "" किस गधा ने इस IAS को चूना ?""!
हद हो गयी समझदारी की आप ही बताये कि विश्व में अभी तक कौन सी परीक्षा प्रणाली या कोई तकनीक विकसित हो पाई हैं जो किसी व्यक्ति की नैतिकता का सही सही आकलन तथा डेटा बेस तैयार करती हो !
- कुछ लोग अपने अनुभव से IAS नामक पद को ही गाली दे कर अपना संस्कार तथा नैतिकता का परिचय दे रहे हैं और यहाँ तक कह डाले कि ""साला IAS सब होता ही हैं ऐसा ""!
हद हो गयी अनुभव की आप ही बताये इस देश में ऐसा कौन सा सरकारी पद ऐसा हैं जो अपनी तरफ से नैतिकता मुहैंया कराती हो !
- कुछ तो उनके माता पिता को ही गाली दे रहे हैं और कह रहे हैं की उसने सही संस्कार नहीं दिया ! हद हो गयी तर्कों की आप ही बताये संस्कार की इस उर्वर भूमि पर कौन अपने बच्चों को संस्कारो से मरहूम रखना चाहेगा !
प्रतिक्रिया तो बहुत हैं पर कितना गिनाऊ ,सबसे बड़ी बात हमको ये कही नहीं दिखी कि समाज का क्या योगदान रहा IAS साहब के सामन्ती चाल ढाल में !
क्या व्यक्ति के नैतिकता और संस्कारो के निर्माण में समाज का भी योगदान होता हैं ?अगर होता हैं तो उस पर भी सवाल उठना चाहिए !
