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इंसान की फितरत
इंसान की फितरत को समझते हैं ये परिंदे, क्या करें, हम दिखावे से भरी दुनियाँ के युवक हैं॥
यहाँ तो आईना भी इंसान की फितरत से जुदा लगता है, हम उस जमाने के युवक हैं, जिस जमाने के इंसान की फितरत बदलती है॥
जब इंसान घर बदल देता है, मुकाम बदल देता है, रिश्ते बदल देता है, दोस्त भी बदल देता है, वही इंसान की फितरत बदल जाती है॥
©#आदर्श मौर्य
