जाल्ला में किसान की स्थिती
सोच कर खड़ा हूं, रास्ते का इशारा क्या है। / राहों का किनारा किया है, टेढी मेढी पगडंडियां। / वारिश की पानी लिए, भींगी अभी भी है, ये रास्ते। / धान की पेड़ थक गए है, मानो झुक गए है, बिचरो से।
हर वर्ष जल्ला में, पानी ठेल जाती है। / सारी शहर को बचाती, बाढ़ की विभीषिका से। / ठेठ होकर, समेटकर सारी वारिश का जल। / उपेक्षा के शिकार ऐसी, छोड़ देते है।
चिंतित है किसान, धान का कटोरा सूखेगी कब। / रास्ते भी टूट जाते, बस खाना पूर्ति करती। / कुछ रोड़े डाल दिए जाते, जनता को खुश करने के लिए। / समस्या लोगो की ईमान की है, ठेकेदारों की है।
सोच कर खड़ा हूं, रास्ते का इशारा क्या है। / राहों का किनारा किया है, टेढी मेढी पगडंडियां। / वारिश की पानी लिए, भींगी अभी भी है, ये रास्ते। / धान की पेड़ थक गए है, मानो झुक गए है, बिचरो से।
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