← PrevNext →
जीवन एक जुआ हैं
जीवन एक जुआ हैं और, लगा सबका दाव हैं !
दिखते नहीं ज़ख्म कहीं पर, रिसते से हर घाव हैं !
कभी धूप कभी छांव हैं मझधार में अटकी नाव हैं !
समानांतर हैं पर सहचर नहीं जीवन बस नदी सा बहाव हैं !
मैं तिरु और वो तीर्ण हुए इसकदर मेरे रक्तस्त्राव हैं !
माना जिसे अपना कल तक, आज दोनों ओर जलता अलाव हैं!
©#कुमार
