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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

जीवन एक जुआ हैं

जीवन एक जुआ हैं और, लगा सबका दाव हैं !

दिखते नहीं ज़ख्म कहीं पर, रिसते से हर घाव हैं !

कभी धूप कभी छांव हैं मझधार में अटकी नाव हैं !

समानांतर हैं पर सहचर नहीं जीवन बस नदी सा बहाव हैं !

मैं तिरु और वो तीर्ण हुए इसकदर मेरे रक्तस्त्राव हैं !

माना जिसे अपना कल तक, आज दोनों ओर जलता अलाव हैं!

©#कुमार