जीवन की धारा
जीवन की एक धारा में, बहने दो। बस जैसा जीना चाहती, ये जीवन। जीवन के प्रवाह, मत मोड़ो इसे। बस बहने दे, शांत सौम्य निर्धारित।
जीवन के मौके को पकड़, आगे चल। कुछ देर छोर अपने को, समर्पित कर। जियो जीवन को जैसे जीवन चाहती। बहने दे इसे अपनी धारा में, मत मोड़ इसे।
यथार्थ की पहचान कर, जीवन की तलाश। सबकुछ समेटे है यह जीवन। बस तू जी इसे, नए नए कहानी गढ़ती। आंदोलित करती, उस अधिकतम की ओर।
जीवन को जीना ही, उच्चतम क्षमता को छूना है। बस जी तू, ईश्वर की दी गई जीवन को। आत्मसात करें, जीवन के रहस्यमय दुनिया। रास्ते खुद दिखती, तालश की शक्ति यही देती।
बिताता हर दिन, कुछ पल शांत। जीवन के साथ, अपने के साथ। आत्मा से जुड़ कर, सभी है। जीवन तो संपूर्ण है, जिए बस इसे।
जीवन की एक धारा में, बहने दो। बस जैसा जीना चाहती, ये जीवन। जीवन के प्रवाह, मत मोड़ो इसे। बस बहने दे, शांत सौम्य निर्धारित।
#जीवन
©#मिथिलेश कुमार
