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कौशलयुक्त व योग्यता संयुक्त युवा
योग्यता को पहचान अपनी, बिगुल बजा रणकारों में। कुशलता को अपना बन तू , अजेय नृशंस प्रहारों में॥
कोशिश कर समस्याओं का हल, तुझे ही निकालना होगा। अनागतम हेयों को तुझे, नित्य सहर्ष सहन करना होगा॥
पशोपेशों को सुलझा दिखा तू, अन्तः अपरबल कौशल कोI बन शीर्ष शिरोमणि सफल कर, तू कृत-कार्य असफल को॥
क्षमता है तेरे अन्दर जीवन की, स्वर्णिम अध्याय बनाने की। अपने कार्यों से छोड़ अमिट छाप, उसे इतिहास मे सँजाने की॥
देश के लिये समर्पित लोहित, बहे जिसके शरीरस्थ रग में। रचनात्मक व कौशलयुक्त, वो युवा कहलाये समाष्टिगत जग में॥ Alive words of Akarshit.
©#आकर्षित मौर्य
