कविता का कुछ नहीं पता
आने वाले का पता सब जाने वाले का नहीं पता सब सोच-सोच कर रह जाते पर कविता का कुछ नहीं पता ।
कब आएगी, छा जाएगी ऊपर से या नीचे से आगे से या पीछे से आराम से या शक्ति से रात से या दिन से जल्दी से या देर से कण से या ढेर से कब कहाँ से आएगी कविता का कुछ नहीं पता
छुरी से या भाला से बन्दूक से या तोप से अनपढ़ से या ज्ञान से जादू से या विज्ञान से बीजेपी से या कांग्रेस से देश या विदेश से डर से या जीत से गोरे से या काले से दिलजले से या दिलवाले से भला किससे आएगी कविता का कुछ नहीं पता
तकनीक और विज्ञान के बल जन्म का समय बना है सरल मन चाहे समय पर औजार और दवाओं के दम पर पैदा करा सकते तो शिशु को तुम इनके सहारे बदल सकते हो नारियों के महीने की तारीख गैर बताओ, क्या तुम इस तकनीक और विज्ञान के बल पर पैदा कर या रोक सकते हो कविता को ?
