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Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

खरा सोना

खरा सोना है, ये, इंतहा न ले इसकी न दंभ, न गुमान सरल, बनता, बिगड़ता न कोई मलाल, न मिलावट खरा सोना है ये।

इस देश के किसान, सोना उगलते, भूख मिटाते लोगों की। मौसम की मार ऐसी होती, टूटते संभलते ये। हार नहीं मानते, कड़ी मेहनत करते। हमारी पेट भरते ये।

इनकी व्यथा तो सुनो। न इनमें द्वेष है, सही संत का जीवन। अपनी रोटी खाते, शुद्ध सोना उपजाते। सीमांत किसान, इस देश की रीढ़।

#फार्मर #भारत #कृषि

©#मिथिलेश कुमार