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Satish Kumar Pandey
Satish Kumar PandeyCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

खुद पर विश्वास

किसी पर इतना भी विश्वास न करो कि तुम्हारा अपना वजूद ही मिट जाए ।

किसी को साथ लेकर चलने की तमन्ना भी इतना न रखो कि तुम्हारा अपना सपना ही टूट जाए ।

किसी रूठे को इतना भी न मनाओ कि तुम्हारी आत्मा ही तुमसे रूठ जाए ।

जिन्दगी में गैरो को इतनी तवज्जो न दो कि जिससे अपना रिश्ता ही पीछे छूट जाए।

सहने की क्षमता ऐसी रखो कि गम के दरिया मे भी तुम्हारा मुस्कुराता चेहरा दिख जाए।

गमों से टकराने का हौसला रखना ये मेरे दोस्त, क्या पता गमों की परछाई हटने के बाद आकर तेरे सिने से सफलता लिपट जाए । खुदगर्ज कि दुनिया मे भी तुम्हारा चमकता हुआ इतिहास लिख जाए ।

©#सतीश