Tinku Sharma Mithlesh
Tinku Sharma MithleshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

कोई माँ कभी न वृद्धाश्रम पधारे

झुकी कमर कभी घर ना बुहारे, हो ना जायें माँ-बाप कभी बेसहारे।

इसलिये हार गयी अपना सबकुछ, कि उसका लाल कभी कुछ न हारे।

माँगती है हर रोज दुआ प्रार्थना में, जिन्दगी में तकदीर ठोकर न मारे।

ऐसे चाक पर बनाया किरदार को, हर कोई उसपर अपना जीवन वारे।

प्यार से देखती है सुन्दर मुखड़े को, जैसे कोई नज़र न किसी को निहारे।

मिले हर माँ को जग में उसका रुतबा, कोई माँ कभी न वृद्धाश्रम पधारे।