क्यूँ मुझे वृद्धाश्रम छोड़ आया है?
खुद का पेट काट-काटकर, मैनें तुझे पढ़ाया है। छुपा के दृगबों को लोरी सुना मैनें तुझे सुलाया है। क्या मैनें ये गुनाह किया जो आज तू मुझे... वृद्धाश्रम छोड़ आया है।
गुरु बन अन्तः में तेरे सूत्रों को चरितार्थ कराया है। तेरे प्रत्येक प्रतिकारों को मैनें अपना उपहार बनाया है। क्या मैनें ये गुनाह किया जो आज तू मुझे... वृद्धाश्रम छोड़ आया है।
उँगलियों को पकड़ मैनें तुझे पैरों पर चलना सिखाया है। आज खुद के पैरों पर खड़ा हुआ तो मिलने तक नहीं आया है। क्या मैनें ये गुनाह किया जो आज तू मुझे... वृद्धाश्रम छोड़ आया है।
तोतली भाषा को समझ तुझे हर खुशी मुहैया कराया है। बीमार हुई जब तो तू मेरी करुण कराह नहीं समझ पाया है। क्या मैनें ये गुनाह किया जो आज तू मुझे... वृद्धाश्रम छोड़ आया है।
तेरे भविष्य के लिये किस्मत ने मुझसे झाडू-पोछा करवाया है। तेरा पेट भरने के लिये नियति ने मुझे एक समय भूखा सुलाया है। क्या मैनें ये गुनाह किया जो आज तू मुझे... वृद्धाश्रम छोड़ आया है।
ताउम्र एक ही कपड़ें में काट मैनें तुझे हर बार नया दिलाया है। साथ थी तब न दिया और आज भर-भरके लाया है। क्या मैनें ये गुनाह किया जो आज तू मुझे... वृद्धाश्रम छोड़ आया है। Alive words of Akarshit.
©#आकर्षित मौर्य
