लोकतंत्र और धर्मतंत्र !!
हमारी राजनीति अब इतनी लाचार हो गयी कि उसे अब धर्मगुरु ,मुल्ला ,मौलबी की उपदेश की जरूरत पर रही है यहाँ तक की विधानसभा में अब नीतिगत मुद्दे पर बहस होने के बदले अब वहा पर भी बाबा जी के अमृत वचन सुनाई देने लगे है ! क्या राजनीति का शुद्धिकरण करने के लिए लोकतंत्र को धर्मतंत्र में तब्दील करने का समय आ गया है ? हरियाणा के विधानसभा में जैन मुनि "तरुण सागर " द्वारा कहे गए अमृत वचन :- "राजनीति पर धर्म का अंकुश जरूरी है धर्म पति है और राजनीति पत्नी ! हर पति की ये ड्यूटी होती है अपनी पत्नी को संरक्षण दे ! हर पत्नी का धर्म होता है कि वो पति के अंकुश को स्वीकार करे ! अगर राजनीति पर धर्म का अंकुश ना हो तो वह मदमस्त हाथी की तरह हो जाता है!..............! "
- यहाँ पर ये मायने नहीं रखता कि मुनि जी अपने ज्ञान कि गंगा से राजनीति की शुद्धिकरण ही तो कर रहे थे सबसे बड़ा सवाल यहाँ पर ये उठता है कि मुनि जी जहां से अपनी ज्ञान की गंगा बहा रहे है थे क्या वो जगह मुनि जी के लिए सही जगह है ?
- और दूसरी सबसे बड़ी बात कि इस तरह के संकीर्ण पुरुषवादी मानसिकता का प्रतिनिधित्व करने वाले को मुनि समझा जाय या मनु का नया अवतार ?
जहां तक पहले सवाल की बात है तो बेशक यह घटना लोकतंत्र का धर्मतंत्र की तरफ बढ़ते कदम की तरफ इशारा कर रहा है ,और अब हम धर्मगुरु, मुल्ला ,मोलबी को एक ऐसा मंच उपलब्ध करा रहे है जहां से वे अपनी एक ख़ास विचारधारा को नैतिकता का लेयर लगा कर प्रचारित कर सकेगा !
यहाँ पर सिर्फ समयस्या तरुण मुनि के करून ध्वनि से नहीं बल्कि धर्म के शेयर बाजार में पोलिटिकल इन्वेस्टर के कारण आने वाले तेजी से है जो आने वाले दिनों में नए नए स्टार्टअप धार्मिक कंपनी के सीईओ को देश के अलग अलग विधानसभा में अपने विचारधारा को प्रसारित करने का मंच उपलब्ध कराएगा और धर्मतंत्र का विकास तेजी से होगा ! और आने वाले दिनों में पता चले कि निर्मलबाबा , आशाराम ,राधे माँ, संत रामपाल , जैसे अनेक पवित्र आत्मा राजनीतिक सुधारक के रूप देश के भिन्न भिन्न विधानसभा में अपना अमृत वचन सुना रहे है !
दूसरा सवाल तो बहुत ही महत्वपूर्ण है कि हमारा समाज जिस धर्मगुरु को अपना आइकॉन मानते है क्या वो इतने इतने महान विचारो के मालिक भी हो सकते है जो एक तरफ तो वो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की बात कर रहे थे तो वही दूसरी तरफ वो स्त्री पर चिड़ियाघर के जानवर की तरह अंकुश लगाने की बात कर रहे थे !
एक थे महान मनु जिसने अपनी मनुस्मृति में पत्नी धर्म का उल्लेख करते हुए कहा है कि पत्नी को अपने पति को देवता मानकर उसके सभी आदेशो का पालन करे और यहाँ तक कि अगर पति वैश्यालय जाना चाहे तो पत्नी का धर्म है कि पति को वैश्यालय तक पहुंचाये !
और एक है ये मुनि जो आज 21 वी शताब्दी के भारत में जहां सिंधु और साक्षी की गली गली में चर्चा हो रही है तो वही ये मुनिवर विधानसभा में बैठकर बता रहे है कि पत्नी का धर्म होता है पति का अंकुश स्वीकार करना !पता नहीं ये लोग और कितना अपने ज्ञान की अमृतधारा में आज के प्रगतिशील विचारो को डुबोएँगे !
