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Kauntey Kumar
Kauntey KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

स्वच्छता का भी मज़ाक बना दिया

स्वच्छता जैसे शब्द का हास्य बना दिया। तुझे हास्य और मुझे खास बना दिया।

गाँधी दिवस को स्वच्छता दिवस बना दिया। गाँधी जी के चश्मे को स्वच्छता का प्रतिक बना दिया। स्वच्छता जैसे शब्द का हास्य बना दिया।

पवित्र स्थानों का मजाक बना दिया। हाथ में झाड़ू लेकर फोटो खींचा लिया। साफ जहग पर झाड़ू फिरा दिया।

गंदगी जगह पर स्वछ्ता का पोस्टर चिपका दिया। स्वच्छता का भी मज़ाक बना दिया।