← PrevNext →
Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

मैं हिंदी बोल रही हूँ...

मैं हिंदी बोल रही हूँ...

भारत की राजभाषा आपमें ख़ुद को तौल रही हूँ स्वतंत्र भारत की राष्ट्रभाषा देवनागरी लिपि टटोल रही हूँ !

मैं हिंदी बोल रही हूँ...

संस्कृत की लाड़ली वागेश्वरी की वरदहस्त सुर के सागर की गागर मीरा सी मिश्री घोल रही हूँ !

मैं हिंदी बोल रही हूँ...

भारत के माथे की बिंदिया पाथेय प्रवाह झर रही हूँ हिंदुस्तान के जन गण में मैत्री को जोड़ने की सांकल खोल रही हूँ !

मैं हिंदी बोल रही हूँ...

तुमने मुझे अपनाया मुझसे दिल का रिश्ता बनाया अंतरराष्ट्रीय सुरा लिये हाथों में आसक्त मुग्ध डोल रही हूँ !

मैं हिंदी बोल रही हूँ...

हिंदी दिवस मनाकर एक पखवाड़ा जश्न कराकर दर्द की गांठें सही लगाकर रस हिंग्लिश घोल रही हूँ ।

मैं हिंदी बोल रही हूँ...

हिन्दी सिर्फ हमारी भाषा नहीं, हमारी पहचान भी है ! ये सुन तब से आत्मसात को मैं जन जन में डोल रही हूँ !

मैं हिंदी बोल रही हूँ... हाँ मैं हिंदी बोल रही हूँ...!

जय_हिन्दी

©#कुमार