मैं हिंदी बोल रही हूँ...
मैं हिंदी बोल रही हूँ...
भारत की राजभाषा आपमें ख़ुद को तौल रही हूँ स्वतंत्र भारत की राष्ट्रभाषा देवनागरी लिपि टटोल रही हूँ !
मैं हिंदी बोल रही हूँ...
संस्कृत की लाड़ली वागेश्वरी की वरदहस्त सुर के सागर की गागर मीरा सी मिश्री घोल रही हूँ !
मैं हिंदी बोल रही हूँ...
भारत के माथे की बिंदिया पाथेय प्रवाह झर रही हूँ हिंदुस्तान के जन गण में मैत्री को जोड़ने की सांकल खोल रही हूँ !
मैं हिंदी बोल रही हूँ...
तुमने मुझे अपनाया मुझसे दिल का रिश्ता बनाया अंतरराष्ट्रीय सुरा लिये हाथों में आसक्त मुग्ध डोल रही हूँ !
मैं हिंदी बोल रही हूँ...
हिंदी दिवस मनाकर एक पखवाड़ा जश्न कराकर दर्द की गांठें सही लगाकर रस हिंग्लिश घोल रही हूँ ।
मैं हिंदी बोल रही हूँ...
हिन्दी सिर्फ हमारी भाषा नहीं, हमारी पहचान भी है ! ये सुन तब से आत्मसात को मैं जन जन में डोल रही हूँ !
मैं हिंदी बोल रही हूँ... हाँ मैं हिंदी बोल रही हूँ...!
जय_हिन्दी
©#कुमार
