Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·1·

मनुष्य बने रहें,रोबोट न बने

पूरे विश्व में हिंसक प्रवृतियां बढ़ी है।चाहे निहत्थे भीड़ को बंदूक को गोलियों से भुनने की घटना हो या मासूमों की बलात्कार और निर्मम हत्या सबमें एक ही बात जाहीर होती है की हमारी संवेदनायें सूख रही है।ऐसे निर्दयों को इस हद तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदार चाहे हॉरर मूवी हो,नशीले पदार्थो का सेवन हो या पोर्न सामग्री लेकिन इसका खामियाजा भुगत रही है पूरी मानवता।

एक बार एक सभा को संबोधित करते हुए महान वैज्ञानिक आइन्स्टाइन ने कहा था-हमने जितने भी वैज्ञानिक उपलब्धियां हासिल की है वह मानवता को सुखी बनाने कि लिये किया है;जब तक मनुष्य, मनुष्य बना रहेगा तो यह वरदान साबित होगा नहीं तो अभिशाप बनने में इसे देर नहीं लगेगी।

वैज्ञानिक उपकरणों के प्रयोग ने मनुष्य के जीवन को आसान बनाया है।कम समय में अधिक जानने की सुविधाएं प्रदान की है।आज पूरी दुनियाँ एक ग्लोबल ग्राम(Global Village) बन गया है।यातायात ने,तकनीक ने संस्कृतियों को जोड़ा है।संस्कृतियों के मेल से कुछ सामाजिक अनियमिततायें उत्पन्न हुई है।लोगों के आवाजाही से,उनकी मिलनसारिता से कुछ लोगों को एतराज है।यहीं से खटास पैदा हुआ है।

धर्म की हानि और आर्थिक नुकशान का हवाला देकर अपराधियों ने अपनी फौज खड़ी की है।उन्होने जोशीले युवाओं को खासकर अपना हथियार बनाया है।

वक़्त का तकाजा है की हम दिग्भ्रमित न होवें।एक समझदार और संवेदनशील बने रहें।