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Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

मस्तानी वाराणसी

वाराणसी मस्तानी सी, बढ़ रही है। जलेबी, सब्जी-पूड़ी की स्वाद ही निराली है, इनकी गलियों में। बंगाली मिठाईयां बड़ी स्वादिष्ट, क्या कहने इसके। विश्वनाथ की नगरी आबाद, दौड़ लगाने को तैयार है।

ट्रेन फेल है, फिर भी लोगो में जज्बा ऐसी है। लोग दूर शहरों से, अपने व्यक्तिगत वाहनों से चले आए। परीक्षा देने, जमावड़ा है छात्रों की। काल भैरव की गलियां में, अन्य जगह भी।

वाराणसी मस्तानी सी, बढ़ रही है। कमी नहीं है चहल-पहल में, भाग रही वाराणसी। पब्लिक जगहों पे इकठ्ठा, होने की बंदिश लागू है। काल भैरव की ऐसे है प्रकोप, कोराना बेअसर।

भीड़ काफी होती है, पुरानी शहर है, पतले रोड। चौड़ीकरण सड़कों की, शहरी सुख-सुविधाओ पर है जोर। वाराणसी, बिल्कुल अलग सी है। गौरवशाली पुरानी वाराणसी हो रही, अप्सरा सी प्रतीत ।

अध्यात्म एवम् आधुनिकता की चादर ओढ़े। दुर्गा की मिट्टी की प्राचीन मूर्ति, अनोखा है। इठला रही है, अटूट है लोगो की आस्था। नजरे निहार रहे लोग, बंद पड़े मंदिरों पर।

वाराणसी मस्तानी सी, बढ़ रही है। विश्वनाथ की नगरी आबाद, दौड़ लगाने को तैयार है। वाराणसी हिन्दू विश्वविद्यालय का कैंपस, अनोखी शांत है। दिल को सुकून दे रही है, मन को भा रही हैं।

#वाराणसी

©#मिथिलेश कुमार