मेके घाट
मेके घाट के वो दिन, विचित्र प्राकृतिक आजूबे। हम कुछ मित्रों की टोली, कुल सात लोग। बेंगलुरु से कुछ मिल की दूरी, कनकपुरा से आगे। सुबह की यात्रा, शाम की गोधिली वेला तक समापन।
फोटोग्राफ लेने से ना चुक रहा था, बटोरता उन यादों को। इसे कहले ऑफिशियल टुर सही, कुछ सहकर्मी भी साथ। कुछ छिछला पानी में स्नान किया, कल कल करती धारा में। गए थे एक दूर के प्राकृतिक तालाब में, काले पत्थर के बीच।
एक टूर बस ने, पहुंचाया मूल स्थल तक जो मेके घाट था। गजब का पहाड़, को काटती हुई टेढ़ी मेढी बहती नदिया। काले पत्थर के पहाड़ों को, भिन्न कलाकृतियों में तरसती कावेरी की धारा।
बड़े बड़े चट्टान बांटती, दो भाग में इस गार्ज़ को। एक फिसलन सी, जाती पथरीली रास्ते एक बड़ा गढ़ा भी। बिल्कुल सिहरन सी, पर रोमांचित प्राकृतिक कल्हलकृतिया। कलकल करती कावेरी की धारा, काटती पथरीली घाटियों को।
रोचक, मनोरम सी, नेत्र विलासिता प्रदान करने वाले दृश्य। हरेक पल को बटोरता हुआ, दूसरे तरफ पहुंचकर समेटता पलो को। मेके घाट के वो दिन, विचित्र प्राकृतिक आजूबे। हम कुछ मित्रों की टोली, कुल सात लोग।
शाम होने वाली, गोधूलि बेला की शरुआत। लौट रहा, एक तरकीब एक मित्र की कैसे पर करू। फिसलन वाली रास्ते, दूसरी ओर खाई, गिर ना परु। बिल्कुल नया था, दूर घर से अकेला मेकेडेटू पर था।
सही सलामत लौट चला, मित्रो के साथ, फोटो लेते हुए। बस की छत पर बैठे हमलोग, मस्ती करते लौटे। फिर बाहर निकल, अपने अपने फाफटिया से लौटा रहे साथ। बीच बीच में रुक, सूर्य की लालिमा को पकड़ने की कोशिश करते।
बिल्कुल ध्यान नहीं, खो जाना इन पलो में, यादों को समेटने में। एक तेजी सी आती बस, सट से निकाल गई बगल से। आनंदित था, रोमांचित भी था, पर हल्की डर सी भी। थोड़ा जिम्मेदारी थी ज्यादा, क्योंकि हेड आफ डिपार्टमेंट था।
किसी भी घटना, दिक्कत भरी हो सकता। सबने पूरी मस्ती की, रात के दस बजे सभी घर पहुंचे। बहुत से प्राकृतिक अजूबे है, भारत की धरती है समेटे। जाने देखे समझे, इनके राज, महसूस करे इनकी खुशियां।
मेके घाट के वो दिन, विचित्र प्राकृतिक आजूबे। हम कुछ मित्रों की टोली, कुल सात लोग। बेंगलुरु से कुछ मिल की दूरी, कनकपुरा से आगे। सुबह की यात्रा, शाम की गोधिली वेला तक समापन। #mekedetu #tourinsouthernindia #tourandtravel #adventuretravel ©#मिथिलेश कुमार
