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Tinku Sharma Mithlesh
Tinku Sharma MithleshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

मेरी एक बात है

जमाने में हर शख्श की एक ही बात है। पहले मेरी सुनो मेरी बस एक ही बात है।

मैं झुकता हूँ सभी बुजुर्गों के पैरों में, मेरी माँ ने सिखाई मुझे एक ही बात है।

ज़रा भी मलाल नहीं कि वो मेरी बाहों में नहीं, उसके दूसरे की बाहों में होने की बात है।

मुझे बेइन्तहा इश्क है,आँसुओं से अपने, जाने के बाद, ये तेरी आखिरी सौगात है।

मत हो परेशां, रख हौसला ए मेरे दोस्त, होने वाली है रौशनी, बस ज़रा सी रात है।

गमों में खूब हँसाकर,खिलखिलाकर, तेरे दुश्मनों की बस यही करारी मात है।

सुन लिया कर थोडी सी डांट माँ-बाप की, ये सज़ा नहीं, दूध वाली गाय की लात है।

निहारकर मोहब्बत से खुद को आईने में, सबसे हसीं खुद से खुद की मुलाकात है।

माटी का मकाँ तेरी मुसाफिर रूह का, फिर छोड़ जाना है कुछ दिन की बात है।

कसमें खा-खाकर तेरा, बस मेरा होना, जीने नहीं देती, बस एक ये ही बात है।

जिस जगह मेरा घर था, दे दिया तुझे, उसी में किराये पर रहने की मिली खैरात है।

ज़िद थी तुझसे ज्यादा मोहब्बत मैं करुँ। मेरी हर गज़ल में बस तेरी ही बात है।