मेरी प्यारी बेटी
दूर करो हर कुरीति, मेरी प्यारी बेटी । भारतीय परिधान को अपनाओ । सखियों से कह दो न, मेरी प्यारी बेटी । संस्कृति की जननी हो, संस्कार का जड़ ।
घर-समाज का मान, तुम्हारे कंधों पर । सखियों से कह दो न, मेरी प्यारी बेटी । जीवन के बदलाव में, मान बढ़ाओ बेटी । स्वाभिमान के पथ पर, अभिमानी न बनना बेटी । सखियों से कह दो न, मेरी प्यारी बेटी ।
काली, दुर्गा की अवतार, तुझमें है वैसी शक्ति । सरस्वती का स्वर, तुझमें अरुंधती सी हो ममता बेटी । सखियों से कह दो न, मेरी प्यारी बेटी । घर-घर की लक्ष्मी, सती अनुसूइया सी अपनाओ भक्ति ।
गंगा जैसी पावन, राष्ट्र की धरोहर है बेटी । सखियों से कह दो न, मेरी प्यारी बेटी । धीर-वीर गंभीर बनो, मानव हो महान बनो । सीता जैसे सहनशक्ति तुझमे हो बेटी । सखियों से कह दो न, मेरी प्यारी बेटी ।
स्वाबलम्बी बनकर फैलाओ ज्ञान की ज्योति । आत्मनिर्भर की हो तुझमें पर, पर सूर्पनखा न बनना बेटी । सखियों से कह दो न, मेरी प्यारी बेटी ।
