मील के पत्थर
हर मील एक पत्थर, जिस पर करूँँ आराम। बैठ के कुछ सोंचू, करूँ आत्मचिंतन। एक पीपल के विशाल वृक्ष, चार मील के पत्थर।
यादों को संजोये, हर राही को कहती। कितने मील के पत्थर है, मंजिल तक। बैठ तू, कर आराम, कर आत्मचिंतन। आगे भी विराम है, पर रुक मत तू।
चलता जा तू, मंजिल की तलाश कर। खोज तू, मील के पत्थर एक लक्ष्य जैसे। मंज़िल तो दूर है, हर मील के पत्थर तो है विराम।
मंजिल की तलाश कभी खत्म नहीं होती। सतत है, तलाश कभी खत्म नहीं होती। हर मील एक पत्थर, जिस पर करूँ आराम। बैठ के कुछ सोंचू, करूँ आत्मचिंतन।
सामने एक गुमटी, बैठी है एक लड़की। बच्चे लिए, साथ है कितने राही गुजरते। मै चल पड़ता हूं, मंजिल की तलाश में। तलाश जारी है, रुक मत तू। आगे भी विराम है, मील के पत्थर।
#tourtovaranasi
©#मिथिलेश कुमार
