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नजरों की भाषा
संभव नहीं हर आरजू बयां हो समझ सको तो मेरे खुदा हो
नजरों की भाषा ढूँढे दिलाशा, अगर दे सके तो सबसे जुदा हो।
मिट्टी की कहानी पानी ही जाने, वो क्या पाये जो पत्थर हुआ हो।
कभी फासले मिटाकर देखो अंदर चिंगारी बस बाहर धुआँ हो।
©#रंजीत
