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Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·3 min read·

गहरी नींद का संबंध है-साँस से

आपकोधूम्रपान,ड्रिंक,हस्तमैथुन,सेक्स,इत्यादि में किसी एक का या सबों का अनुभव हो तो एक मिनट आप सोचिएकि इनके करने से आपके शरीर में क्या परिवर्तन होता है।आप गौर करने पर पाएंगे कि इन सारे में हमारे सांस लेने कि गति तीव्र हो जाती है।तेजी से सांस लेने और छोड़ने से पूरे शरीर सहित ब्रेन में भी ब्लड सरकुलेशन तीव्र होता है,हम तनाव रहित महसूस करते है,मूड फ्रेश हो जाता है,हम थकते है और हमें गहरी नींद आती है।

जिनकोतेजी से सांस लेने और छोड़ने की उपरोक्तसुविधायें प्राप्त है और वे इसे आजमाने में गर्व महसूस करते और अपने आप को लकी(भाग्यशाली) समझते है; किसी और झंझट में नहीं पड़ना चाहते वे इस लेख को आगे न पढ़ें।उन भाग्यवानों को मेरी हार्दिक शुभकामनायें।

लेकिन जो लोग इन उपायों से ऊब चुके है; कुछ दूसरे आसान उपाय की तलाश में है ; या जिन्हें किसीकारण सेभगवान ने उपरोक्त सुविधायें नहीं दी है उनसे मैं इस लेख को अंत तक पढ़ने का निवेदन करता हूँ।

नाक की सामान्य क्रिया से आप सभी परिचित होंगे। सांस लेना,सुगंध लेना,सर्दी लगने पर कफ को शरीर से बाहर करना,आदि नाक की सामान्य क्रियाएँ है।ये दृश्य है और इसे समझने में किसी को कोई परेशानी नहीं होती है।इस लेख में मैं दो-चार ऐसी बातें बताने जा रहा हूँ जो नाक की अदृश्य क्रियाओं और उसके सकारात्मक प्रभावों को दर्शाती है।इसे मैंने अपने जीवन में उतारा है और लाभ पाया है।उम्मीद करता हूँ आपमें से कुछ को ये प्रयोग मदद करे।

सर्वप्रथम अपनी लाईफ स्टाईल का परिचय दे देता हूँ जिसे आप पैमाना मानकर अपने-आप की स्थिति का आंकलन कर सकते है। मै वैसे लोगों की श्रेणी में आता हूँ जो फिजिकल एक्सरसाइज नहीं कर पाते।जिनकी 24 घंटे की जिंदगी मशीन की तरह काम करने में गुजरती है।दुनियाँ के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर दिल्ली में रहता हूँ और यहाँ की जहरीली हवा,पानी,इत्यादि का सेवन करता हूँ।दिनचर्या का 8-10 घंटा एयर कंडिशन में गुजरता है; कुछ टाईम खुली सड़क पर ट्रैफिक की भीड़ में ;कुछ पब्लिक प्लेस में और बाँकी अपनी कॉलनी के आवास में।

हालाँकि इस लेख में मैं मुख्य रूप से नाक के बारे में बात करूंगा लेकिन शरीर की अन्य इंद्रियों के बारे में थोड़ी जानकारी दे देता हूँ जिसे मैंकभी कभी इस्तेमाल करूंगा। मुख्य रूप से हमारे शरीर की पाँच इंद्रियाँ है-आँख,त्वचा(स्कीन),जीभ,कान और नाक।

इन इंद्रियों की सफाई के बारे में बात करूँ तो समान्यतः आँख की सफाई हम आँख में छींटा मारकरकर लेते ,त्वचा कोनहा-धोकरसाफ कर लेते,ब्रश और जीवी से जीभ की भी सफाई हो जाती है।कान की सफाई भी उसके खुजलाने पर कभी-कभी हो जाती है।

नाक की सफाई भी हम करते है,लेकिन सही तरीके से नहीं करते।नहाने वक़्त और कुल्ला-गल्ला करने के उपरांत एक-दो बार सुर्र-सुर्र करते है और यह मान लेते है की नाक की सफाई हो गयी।ये तो नाक का मल एवं धूल-कण बाहर निकलने की क्रिया है।वस्तुतः नाक स्वांसोंकी इंद्रिय है और इसकी सफाई हवा से होनी चाहिए।यानि गहरी सांस लेना और छोड़ना।सभ्य भाषा में इसे प्राणायाम कहा जाता है।

समय,आसन,क्रम इत्यादि प्राणायाम के कई अनुशासन है।जिसका जान-बूझकर मैं यहाँ जिक्र नहीं कर रहाहूँ।क्योंकि इन अनुशासन की जाल में उलझने के डर से ही अधिकांशलोग प्राणायाम नहींकरते।वे धूम्रपान,ड्रिंकिंग,हस्तमैथुन,सेक्स,इत्यादि करनेको इसकी अपेक्षा सहज मानते और उसकी लत में फँस जाते है।

जब भी आपको तनाव महसूस हो तो अपने स्वांस तंत्र को चेक करिए।अपनेनाककेएकछेद को अपने हाथ की एक उंगली से बाहर से दबाकर बंद करिये औरदूसरे नाक से गहरी सांस लीजिये और छोड़िये।अगर नाक में कुछ फँस नहीं रहा है और आप पेट भर सांस ले रहे है तो नाक का यह छेद फ्री है और सही कंडिशन में है।इसी प्रकार दूसरे छेद को भी चेक करिये।

मानसिक तनाव और दवाब के समय नाक के दोनों में से कोई छेद ब्लॉक हो जाता है या उसमें काम हवा आ-जा रही होती है।जो छेद ब्लॉक है उसे फ्री करने का उपाय है उससे बार-बार सांस लेना।शुरुआत में धीरे-धीरे और बाद में तेजी से।थोड़ी देर में जब नाक के दोनों छेदों से पर्याप्त हवा आने-जाने लगेगा तो आप तनाव रहित महसूस करेंगे।

जब कई दिनों से आपको ठीक से नींद नहीं लग रहा हो,बीच-बीच में नींद टूट जा रहा हो,सोकर उठने के बाद शरीर भारी लगे,दिनमें बार-बार जम्हाई(हाफ़ी) आये,स्वभाव में चिड़चिड़ापन,बात-बात पर गुस्सा आये तो आप अपनेस्वांस तंत्र को चेक करिए।दिक्कत यहीं होता है।यहीं से आपको समाधान मिल जाएगा।

अगर आप इस लेख मेंबताये आसन तरीके से सांसलें तो कम खर्च और बिना जोखिम के अच्छी नींद ले सकते है और तनाव रहित जीवन जी सकते है।