नाम पर कोहराम
वैसे इस देश में निजी मामलो में बिना पूछे सलाह देने वाले सलाह मंडल चिर काल से अपनी जिम्मेदारी निभाते आये है पर कुछ समय से इनकी सलाह देने की तीव्रता में अचानक बदलाव देख के तो लग रहा है कि जो सलाह मंडल रूपी बौद्धिक इंजन कल तक कोयले से चल रहा था ,वो इंजन अब परमाणु ऊर्जा से संचालित होने लगी है ! पता नहीं इस बदलाव का कारण भारत का परमाणु आपूर्तिकर्ता देशो से गहराते संबंधों से है , या फिर भारत का अपने सबसे प्रगतिशील संगठन (आरएसएस) से गहराते सम्बन्ध से है !
कारण जो भी हो पर पिछले कुछ समय से इसका स्पष्ट उदहारण देखने को मिल रहा है चाहे वो सानिया मिर्जा की शादी हो , या फिर दिग्विजय सिंह की शादी हो ,या फिर सैफीना की शादी हो ,या फिर टीना और अतहर की शादी हो, या फिर सैफीना के पुत्र के नामकरण का मामला हो !
इस बार तो ये सलाह पुरुष सब तैमूर अली खान पटौदी के आगमन से इतने एक्टिव हो गए जितना तैमूर लंग के आक्रमण से भी नहीं हुए थे ! पता नहीं इस बौद्धिक प्रगति का राज़ क्या है ,पर जो भी नोट बदल रहा है सोच बदल रहा है !
ये नामकरण सही है या गलत ,इससे पहले सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि तार्किक होने का ढोंग करने वाली ये समाज अपने नए पीढ़ी की शुरुआत भी अपने पूर्वाग्रह से करके क्या साबित करना चाहती है !
र्वाग्रह कहने का सीधा अर्थ ये है कि आप अपने समाज को ये बता रहे है कि किसी भी ऐतिहासिक नाम का कोई व्यक्ति उसके द्वारा किये गए कुकृत्य या उसके उपलब्धि का मालिक अनायास ही हो जाता है!
कुछ सलाह पुरुष कह रहे है कि ऎसे नाम रखने से समाज में नकारात्मक सन्देश जाती है ,अब यहाँ पर सवाल ये उठता है कि ये नकारात्मक सन्देश नाम के कारण जा रहा है या फिर समाज के "नाम" के प्रति बने पूर्वाग्रहो के कारण !
और वैसे भी सैफ और करीना ने इस नाम के शाब्दिक अर्थ और संज्ञा और विशेषण के सम्बन्ध को समझने के बाबजूद ये नाम रखा है ,जो उनका विशेषाधिकार भी है ! इस पर किसी को पेट में दर्द क्यों होनी चाहिए और सबसे बड़ी बात कि नाम रखने से पहले हमलोगो को ना तो सैफ का कॉल आया था और ना बेबो का तो फिर चिंता क्यों !
और कुछ धर्मराज तो सैफ पर धर्मान्धता का आरोप लगा रहे है पता नहीं वो कैसे भूल गये कुछ दिन पहले ही सैफ ने अपनी बहन सोहा अली खान की शादी एक कश्मीरी ब्राह्मण कुणाल खेमू से करवाई थी !
खैर जो भी हो..........कुछ तो बदल रहा है !
