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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

नासमझ कहा मुझे

नासमझ कहा मुझे हर्फ़ हर्फ़ पढ़ा जिसे !

वर्णमाला प्यार की दिया जो रटा उसे !

वर्ण-वर्ण, शब्द-शब्द क्या नहीं कहा जिसे !

हलंत से विसर्ग तलक कैसे-कैसे हैं सहा उसे !

उत्कर्ष पर चढ़ा मुझे सतह की फिकर जिसे !

गद्य की व्यंजना भी पद्य तक पढ़ा उसे !

तर्क से कुतर्क तक हर नज़्म में जड़ा जिसे !

©#कुमार